काव्य सुरों से सजी साहित्यिक संध्या

काव्य सुरों से सजी साहित्यिक संध्या 

महाराष्ट्र–तेलंगाना इकाई का काव्य संगम

भूमिका

शब्द जब संवेदनाओं का रूप लेकर मंच पर उतरते हैं, तब कविता केवल रचना नहीं रह जाती, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति बन जाती है। साहित्य और संस्कृति के इसी सुंदर समन्वय को साकार करते हुए काव्य रसिक संस्थान महाराष्ट्र इकाई के तत्वावधान में तेलंगाना इकाई के साथ एक गरिमामयी ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। साहित्यिक सौहार्द, रचनात्मक ऊर्जा और काव्य रस से सराबोर इस आयोजन ने प्रतिभागियों और श्रोताओं के हृदय में विशेष स्थान बनाया।

कार्यक्रम विवरण

दिनांक 22 मई 2026, शुक्रवार को सायं 7:00 बजे गूगल मीट के माध्यम से आयोजित इस भव्य काव्य गोष्ठी में साहित्य प्रेमियों और कवि-रचनाकारों ने सहभागिता निभाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता आदरणीय डॉ. रामकुमार रसिक जी ने की। उनके प्रेरणादायी व्यक्तित्व और साहित्यिक अनुभव ने आयोजन को गरिमा प्रदान की।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में आदरणीय डॉ. रामरतन श्रीवास ‘राधे-राधे’ जी की स्नेहिल उपस्थिति रही, वहीं मुख्य अतिथि के रूप में आदरणीया डॉ. मीना जैन सुनीता जी ने अपनी गरिमामयी सहभागिता से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

कार्यक्रम का संचालन मेघा अग्रवाल जी एवं ज्योति कृष्णा जी ने अत्यंत कुशलता, सहजता और प्रभावशाली शैली में किया। उनके शानदार मंच संचालन ने कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा और सचमुच आयोजन में चार चाँद लगा दिए। काव्य पाठ, साहित्यिक संवाद और आत्मीय वातावरण से परिपूर्ण यह गोष्ठी साहित्यिक एकता एवं सृजनशीलता का सुंदर उदाहरण बनकर उभरी जिसमें मेरी निहारिका की सम्पादक विजया डालमिया और प्रतिमा त्रिवेदी ने भी प्रतिभाग किया।

यह आयोजन न केवल कविताओं के आदान-प्रदान का मंच बना, बल्कि विभिन्न राज्यों के साहित्यकारों को एक सूत्र में जोड़ते हुए रचनात्मक संवाद की नई संभावनाओं को भी सशक्त करने वाला सिद्ध हुआ।

झलकियाँ 












सूचना स्रोत 


पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 






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