सम्मान से संकल्प तक
सम्मान से संकल्प तक एक प्रधानाचार्य का चिंतनपूर्ण आत्मकथ्य प्रस्तुति विचार, शिक्षा एवं जागरूकता के साझा प्रयास के अंतर्गत “शिक्षा का वास्तविक सम्मान तब है, जब उससे किसी विद्यार्थी का जीवन बेहतर बने।” आत्मकथ्य : श्री प्रवेंद्र दहिया , प्रधानाचार्य, होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज, जड़ौदा, मुजफ्फरनगर भूमिका एक सम्मान, अनेक प्रश्न जीवन में कुछ अवसर ऐसे आते हैं, जब प्राप्त सम्मान व्यक्ति को प्रसन्नता से अधिक आत्मचिंतन की ओर ले जाते हैं। वे अवसर पूछते हैं कि हमने अब तक क्या किया, क्यों किया और आगे क्या करना शेष है? ‘मंथन-2.0’ में एक्सीलेंस इन स्टूडेंट्स डेवलपिंग अवार्ड से सम्मानित होना मेरे लिए केवल व्यक्तिगत उपलब्धि का विषय नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति हमारे सामूहिक दायित्व को पुनः समझने का अवसर है। इस सम्मान में मैं अपने विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और उन सभी सहयोगियों के प्रयासों की झलक देखता हूँ, जो शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखकर जीवन के विकास से जोड़ने में विश्वास रखते हैं। मेरा मानना है कि प्रधानाचार्य का पद किसी संस्था पर अधिकार रखने क...