जीवन के सच से जुड़ा वृत्तांत
जीवन के सच से जुड़ा वृत्तांत भूमिका जीवन की सबसे बड़ी शिक्षाएँ हमेशा पुस्तकों के पन्नों से नहीं मिलतीं; अनेक बार वे हमारे छोटे-छोटे अनुभवों, सामूहिक प्रयासों और गुरुजनों के सान्निध्य से हमारे व्यक्तित्व का स्थायी हिस्सा बन जाती हैं। बचपन में किए गए कुछ साधारण-से कार्य समय के साथ असाधारण जीवन-मूल्यों का आधार बन जाते हैं। यही अनुभव हमें सिखाते हैं कि श्रम कभी छोटा नहीं होता, सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती और आत्मनिर्भरता ही जीवन की वास्तविक शक्ति है। प्रस्तुत वृत्तांत भी विद्यालयीन जीवन की ऐसी ही एक स्मृति है, जिसने केवल एक चबूतरे का निर्माण नहीं किया, बल्कि अनेक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को भी गढ़ दिया। स्वावलंबन की सीख बात उस समय की है, जब हम सातवीं-आठवीं कक्षा में पढ़ते थे। गाँव में केवल एक ही सरकारी विद्यालय था और गाँव के सभी बच्चे वहीं शिक्षा ग्रहण करने जाते थे। उस समय शिक्षा और शिक्षकों—दोनों का स्तर अत्यंत उच्च था। बच्चों के मन में शिक्षकों के प्रति सम्मान के साथ-साथ अनुशासन का स्वस्थ भय भी रहता था। शिक्षक भी पूरी ईमानदारी और निष्ठा से अपने कर्तव्य का निर्वहन करते थे। आवश्यकता ...