🌼 संकल्पना से साकार तक 🌼
🌼 संकल्पना से साकार तक 🌼 हस्तिनापुर साहित्य उत्सव 2026 (निदेशक आदर्श कुमार की दृष्टि का सजीव रूप ) कभी-कभी एक छोटी-सी कल्पना, समय की सीमाओं को तोड़कर एक विराट स्वरूप ले लेती है। ऐसा ही कुछ हुआ, जब सेवानिवृत्त निदेशक आदर्श कुमार ने अपनी कृति अनुभूति को मात्र चार दिनों में मूर्त रूप देने का संकल्प लिया। यह केवल एक पुस्तक के प्रकाशन की योजना भर नहीं थी— यह एक भाव था… एक दृष्टि थी… एक ऐसा बीज, जिसमें साहित्य, संस्कृति और समाज को एक मंच पर लाने का स्वप्न छिपा हुआ था। 🌿और यहीं से आरम्भ हुआ🌿 हस्तिनापुर साहित्य उत्सव 2026 का विराट विचार और उनको मिली प्रशस्ति आदर्श कुमार की कल्पना में यह उत्सव केवल कार्यक्रम नहीं था, बल्कि— * हस्तिनापुर की ऐतिहासिक चेतना को पुनर्जीवित करने का प्रयास, * साहित्य को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम, * और आत्मबोध से विश्वबोध की विचारधारा को व्यवहार में उतारने का मंच। इसी संकल्प को साकार करने के लिए, बहसूमा रियासत के ऐतिहासिक परिवेश में, ग्राम हँसापुर को चुना गया—जहाँ इतिहास स्वयं साक्षी बन सके। और फिर… जिसे एक विचार के रूप में देखा गया था, वह धीरे-धीरे एक वृह...